Home » राजस्थान » सीमलवाड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट के रिक्त पद को भरने का प्रयास करेंगे – विधि एवं विधिक कार्य मंत्री

सीमलवाड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट के रिक्त पद को भरने का प्रयास करेंगे – विधि एवं विधिक कार्य मंत्री

विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद रिक्त होने से लिटिगेंट्स को हो रही असुविधा को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय से निवेदन कर पद को शीघ्र भरने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में सीमलवाड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद खाली होने के कारण इसका अतिरिक्त प्रभार वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सांगवाड़ा को दिया गया है। इससे क्षेत्र के लिटिगेंट्स को अधिक दूरी के कारण असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

विधि एवं विधिक कार्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक अनिल कुमार कटारा द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय की हाई पावर कमेटी की अनुशंसा के बिना किसी भी नए न्यायालय की स्थापना संभव नहीं है। सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, सीमलवाड़ा को वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में क्रमोन्नत करने के संबंध में मंत्री ने स्पष्ट किया कि संबंधित क्षेत्र में लंबित मुकदमों की संख्या मात्र 11 है, जो निर्धारित मानकों के अनुसार क्रमोन्नयन के लिए आवश्यक संख्या से कम है।

इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में विधि एवं विधिक कार्य मंत्री ने बताया कि डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा कस्बे में वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय स्वीकृत नहीं है। सीमलवाड़ा के अलग मुख्यालय पर स्थित होने के कारण सीमलवाड़ा में कम से कम तीन दिन वैकल्पिक सप्ताह में कोर्ट लगवाए जाने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने जानकारी दी कि सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, सीमलवाड़ा को वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में क्रमोन्नत करने के संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय से प्रस्ताव प्राप्त होने पर भी वित्तीय संसाधन की उपलब्धता नहीं होने के कारण उक्त न्यायालय का क्रमोन्नयन नहीं हो सका है। भविष्य में राजस्थान उच्च न्यायालय से पुनः प्रस्ताव प्राप्त होने पर तथा वित्तीय संसाधन की उपलब्धता होने पर उक्त न्यायालय के क्रमोन्नयन के संबंध में राज्य सरकार द्वारा विचार किया जा सकेगा।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

0
0

RELATED LATEST NEWS

infoverse academy

Top Headlines