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ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांगे विधानसभा में ध्वनिमत से पारित

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण विकास विभाग की 98 अरब 18 करोड़ 41 लाख 30 हजार रूपए की अनुदान मांगें गुरूवार देर रात विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हो गई। ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब देते हुए मनरेगा में करौली जिले के मंडरायल में 28 करोड़ रूपए का भुगतान कर केवल 2 करोड़ के कार्य होने तथा दौसा जिले की महवा विधानसभा क्षेत्र में 38 लाख रूपए का भुगतान कर पुराने सीसीटीवी कैमरे खरीदने और उनके भी एक दिन भी कार्यशील नहीं हो पाने के प्रकरणों की जांच करने के लिए एसीबी को निर्देश दिए।

डॉ. मीणा ने कहा कि मनरेगा में ऐसे प्रकरण अपवाद नहीं, सामान्य थे। पर्याप्त सबूतों के बावजूद दबाव में तत्कालीन 6 जिला कलेक्टरों को क्लीन चिट दी गई। टांका निर्माण के नाम पर गत सरकार के कार्यकाल में 1450 करोड़ रूपए का घोटाला किया गया और इसका खुलासा भी उसी सरकार के मंत्रियों ने किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मनरेगा की ऐसी गड़बड़ियों से गरीबों के हितों की रक्षा करने, योजना को भ्रष्टाचारप्रूफ बनाने, 100 की जगह 125 दिनों में गारंटीशुदा काम देने के लिए ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी वीबी-जी राम जी लाए हैं।

हरियालो राजस्थान ग्रीन क्रेडिट से लिंक होगा-

डॉ. मीणा ने हरियालो राजस्थान अभियान को ग्रीन क्रेडिट से जोड़ने की घोषणा की। इससे इस अभियान और राज्य के विकास के लिए अन्य कार्यक्रम और योजनाओं के लिए अतिरिक्त फण्ड उपलब्ध होगा। पर्यावरण अनुकूल सतत और समावेशी विकास के लक्ष्य की पूर्ति में भी यह बड़ा कदम साबित होगा।

डॉ. मीणा ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 2000 महिलाओं को बीमा सखी के रूप में प्रशिक्षित करने की घोषणा की। उन्होंने आंगनवाडी केन्द्रों, विद्यालयों में तैयार होने वाले मिड-डे मील में पौष्टिक व ताजा सब्जियों को शामिल करने व महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त करने के लिए 11000 अमृत पोशण वाटिका विकसित करने, ग्रामीण विकास से सम्बंधित सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रबंधन, निगरानी और क्षमतावर्धन के लिए जयपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्रेनिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग स्थापित करने, केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण मॉडल को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राज्य मद से संचालित सभी योजनाओं में लागू करने, पीएम आवास निर्माण में प्रचलित स्थानीय तकनीक की आईआईटी, दिल्ली द्वारा स्टडी करवा कर प्रोटोटाइप नक्शे तैयार कर नवगठित पंचायत समिति मुख्यालयों पर 2-2 व अन्य पंचायत समिति मुख्यालयों पर 1-1 प्रोटोटाईप आवास निर्मित करवाने की भी घोषणा की।

उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना व राजीविका का कंवर्जेंस कर महिला स्वयं सहायता समूहों के क्लस्टर लेवल फैडरेशन के कार्यालय भवन/कार्यशालाओं के निर्माण की घोषणा की। ये भवन महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण, निर्मित उत्पादों की ब्रांडिंग, विपणन, बिक्री के मंच के रूप में उपयोगी होंगे।

उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण मैकेनिज्म को सशक्त करने, मनरेगा में कार्य कर रहे संविदा कार्मिकों को राजकीय सेवा में समायोजित करने के लिए नवीन ग्रामीण सेवा नियम बनाने, आवारा व परित्यक्त पशुओं के लिए प्रत्येक पंचायत समिति में 1 कांजी हाउस खोलने, जैव विविधता संरक्षण और औषध सम्बंधी पौधों तक सहज पहुंच और आयुर्वेद को जनसुलभ बनाने के लिए अमृत संजीवनी पार्क विकसित करने, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 2000 महिलाओं को बीमा सखी के रूप में प्रशिक्षित करने की भी घोषणा की।

ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन व गरीब परिवारों को आवास के लिए निःशुल्क भूमि आवंटन किया जाता है लेकिन बढ़ती आबादी के कारण अधिकांश जगह अब भूमि आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही। डॉ. मीणा ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए आबादी विस्तार के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

डॉ. मीणा ने सदन को बताया कि स्थानीय विधायक निधि व स्थानीय सांसद निधि में अनुमति, प्रक्रिया, भुगतान सम्बंधी नियमों को सरल और व्यवहारिक बनाने के लिए विधायकों और विभागीय अधिकारियों की समिति गठित की गई है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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