*जयपाल पूनिया हत्याकांड में शुक्रवार को एडीजे न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 11 में से 9 आरोपियों को दोषी करार दिया*
*न्यूज इन राजस्थान कुचामन सिटी(सोनू पारीक)*
बहुचर्चित जयपाल पूनिया हत्याकांड में शुक्रवार को एडीजे न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 11 में से 9 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में न्यायालय अब शनिवार को सजा का एलान करेगा।
*9 दोषी,2 को मिला संदेह का लाभ*
एडीजे कोर्ट के न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल ने मामले की सुनवाई करते हुए मोती सिंह सहित 9 आरोपियों को हत्या का दोषी माना है।वहीं मामले में नामजद दो अन्य आरोपियों—कुलदीप और हनुमान सैनी—को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया है।
*शनिवार को होगा सजा का एलान*
अपर लोक अभियोजक मनीष शर्मा के अनुसार,न्यायालय ने आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी सिद्ध कर दिया है,लेकिन सजा की अवधि पर फैसला सुरक्षित रखा है।शनिवार को सजा के बिंदु पर अंतिम सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा कि दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी।फैसले के बाद सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
*क्या था मामला*
गौरतलब है कि 14 मई 2022 को नावां सिटी के तहसील रोड पर रेलवे फाटक के पास जयपाल पूनिया की ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी।इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश में तूल पकड़ा था और तत्कालीन विधायक के भाई मोती सिंह का नाम सामने आने के बाद लंबे समय तक आंदोलन चला था।सीबीआई जांच की मांग के बीच चले इस कानूनी घटनाक्रम में अब जाकर न्यायालय का यह महत्वपूर्ण निर्णय आया है।
*जयपाल पूनिया की 14 मई 2022 को हुई थी हत्या*
यह घटना शनिवार के दिन दोपहर के समय नावां सिटी के रेलवे फाटक के पास तहसील रोड पर घटित हुई थी। हमलावरों ने उनकी गाड़ी को रोककर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी।इस मामले में तत्कालीन कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह चौधरी के बड़े भाई मोती सिंह पर जयपाल की हत्या करवाने का आरोप लगा था।जिसके बाद इस मामले में कई दिनों तक बड़ा आंदोलन चला। और सीबीआई जांच की भी मांग उठी। मामले में मोती सिंह के साथ 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
*मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी*
घटना 14 मई 2022 को हुई थी और इसके मात्र 3 दिन बाद, 17 मई 2022 को पुलिस ने तत्कालीन विधायक के भाई मोती सिंह सहित 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने की पुष्टि की थी।
*अन्य गिरफ्तारियां*
मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित की गई एसआईटी (SIT) और क्राइम ब्रांच ने जांच आगे बढ़ाई और जून 2022 तक अन्य शूटरों और षड्यंत्रकारियों को भी पकड़ लिया गया था। 15 जून 2022 तक की रिपोर्ट्स के अनुसार,पुलिस ने इस मामले में कुल 8 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया था।
*फरार आरोपियों पर इनाम*
कुछ आरोपी घटना के बाद फरार हो गए थे, जिन पर पुलिस ने इनाम भी घोषित किया था।बाद में उन्हें अलग-अलग स्थानों से दबोचा गया।जयपाल पूनिया और आरोपियों के बीच मुख्य रूप से नमक कारोबार का वर्चस्व और राजनैतिक रंजिश विवाद की जड़ थी।
*नमक कारोबार पर कब्जा*
जयपाल पूनिया खुद नमक कारोबारी था और नावां क्षेत्र के नमक व्यवसाय में उसका काफी प्रभाव था।आरोपियों के साथ उसका लंबे समय से व्यापारिक वर्चस्व को लेकर टकराव चल रहा था।
*राजनैतिक रंजिश*
जयपाल पूनिया राजनैतिक रूप से भी सक्रिय था।वो पहले कांग्रेस से जुड़ा था, लेकिन बाद में हनुमान बेनीवाल की पार्टी (RLP) और भाजपा के करीब आ गया था।इस कारण तत्कालीन सत्ताधारी दल के स्थानीय नेताओं और उनके करीबियों से उसकी अनबन चल रही थी।
*पुराने मुकदमे*
जयपाल पूनिया के खिलाफ भी 12 आपराधिक मामले दर्ज थे और वो नावां थाने का हिस्ट्रीशीटर था। उसके और विपक्षी गुट (मोती सिंह पक्ष) के बीच क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रखने को लेकर कई बार कहासुनी और विवाद हो चुके थे।
*जान का खतरा*
हत्या से कुछ समय पहले भी जयपाल पूनिया ने अपनी जान को खतरा बताया था। उसकी पत्नी द्वारा दर्ज करवाई गई FIR के अनुसार,जयपाल ने बताया था कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और कुछ प्रभावशाली लोग उसे झूठे मामलों में फंसाने या खत्म करने की साजिश रच रहे हैं।इसी आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई के कारण 14 मई 2022 को हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई थी।
Author: newsinrajasthan
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