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सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं का तांडव! नोटिस में सरकारी भूमि का जिक्र, फिर भी निर्माण जारी

जयपुर। जेडीए जोन-10 के जयसिंहपुरा क्षेत्र में किलनगढ़ स्थित खसरा संख्या 13/1 की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण और निर्माण को लेकर क्षेत्रवासियों का गुस्सा अब सड़क से जेडीए कार्यालय तक पहुंच गया है। बड़ी बात यह है कि जेडीए की ओर से जारी नोटिस में जमीन के सरकारी होने का उल्लेख किए जाने के बावजूद मौके पर निर्माण गतिविधियां जारी रहने का आरोप लगाया जा रहा है। इसी को लेकर क्षेत्रवासियों ने जेडीए कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर कथित रूप से भूमाफियाओं का कब्जा बढ़ता जा रहा है। जेडीए की ओर से नोटिस जारी किया गया, लेकिन नोटिस के बाद भी निर्माण कार्य रुकने के बजाय कथित रूप से जारी रहा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब जेडीए को जमीन के सरकारी होने की जानकारी है और इस संबंध में नोटिस भी जारी हो चुका है, तो फिर निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने में प्रशासन क्यों नाकाम साबित हो रहा है?

नोटिस में सरकारी जमीन का उल्लेख, फिर भी निर्माण कैसे?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जेडीए के नोटिस को लेकर खड़ा हो रहा है। क्षेत्रवासियों के अनुसार नोटिस में संबंधित भूमि को सरकारी जमीन बताया गया है। यदि यह भूमि सरकारी है तो उस पर किसी भी प्रकार का कथित अतिक्रमण अथवा निर्माण गंभीर विषय है। इसके बावजूद नोटिस जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य चलते रहने के आरोप जेडीए की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि नोटिस जारी करना कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है, लेकिन सरकारी जमीन को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए मौके पर प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है। यदि नोटिस के बाद भी निर्माण चलता रहता है तो इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बढ़ने की आशंका है।

जेडीए कार्यालय पर क्षेत्रवासियों का प्रदर्शन

मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने जेडीए कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जेडीए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकारी जमीन को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आमजन की जमीन और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है, ऐसे में शिकायत और नोटिस के बावजूद निर्माण जारी रहना चिंता का विषय है।

क्षेत्रवासियों ने अधिकारियों से मांग की कि खसरा संख्या 13/1 की भूमि का मौके पर भौतिक सत्यापन, सीमांकन और रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराई जाए। यदि भूमि सरकारी पाई जाती है और उस पर अतिक्रमण अथवा अवैध निर्माण पाया जाता है तो तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मिलीभगत के लगाए गंभीर आरोप

विरोध प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रवासियों ने जेडीए प्रशासन और कथित भूमाफियाओं के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिना विभागीय स्तर पर किसी न किसी तरह की ढिलाई के सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य लंबे समय तक जारी रहना संभव नहीं है। हालांकि,मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

लोगों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि निर्माण कब से चल रहा है, किसकी अनुमति या दस्तावेजों के आधार पर निर्माण किया जा रहा है और जेडीए के नोटिस के बाद भी मौके पर निर्माण क्यों नहीं रुका।

कागजी नोटिस या धरातल पर कार्रवाई?

अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जेडीए की कार्रवाई सिर्फ नोटिस जारी करने तक सीमित रह जाएगी या मौके पर भी इसका असर दिखाई देगा। सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होने पर अतिक्रमण बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में क्षेत्रवासियों की नजर अब जेडीए जोन-10 प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सरकारी भूमि पर वास्तव में अतिक्रमण और निर्माण हो रहा है तो प्रशासन को बिना किसी दबाव के नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नोटिस जारी होने के बाद निर्माण गतिविधियां कैसे जारी रहीं।

आखिर जेडीए प्रशासन की क्या है मजबूरी?

पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जेडीए के नोटिस में जमीन को सरकारी बताया गया है, तो फिर निर्माण पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही? यदि निर्माण नियमों के विपरीत है तो कार्रवाई में देरी किस वजह से हो रही है? और यदि निर्माण वैध है तो फिर सरकारी जमीन से जुड़े नोटिस और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

क्षेत्रवासियों ने जेडीए प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने, रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि जेडीए जोन-10 प्रशासन इन सवालों का क्या जवाब देता है और खसरा संख्या 13/1 की कथित सरकारी जमीन को लेकर चल रहे विवाद पर कब और कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।

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Author: newsinrajasthan

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