झारखंड राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री महेश शरदचंद्र सोनेक अपनी धर्मपत्नी के साथ दो दिवसीय राजकीय भ्रमण पर पलामू टाइगर रिजर्व पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने बेतला राष्ट्रीय उद्यान सहित पलामू व्याघ्र परियोजना के विभिन्न पर्यटन एवं संरक्षण स्थलों का अवलोकन किया।
भ्रमण के दौरान पलामू व्याघ्र परियोजना के उपनिदेशक श्री प्रजीशकांत जेना द्वारा केचकी में दो नदियों के संगम स्थल पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया। संगम तट पर आयोजित शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य प्रस्तुति का माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं उनकी धर्मपत्नी ने आनंद लिया। तत्पश्चात उन्होंने बेतला राष्ट्रीय उद्यान में ओपन जीप सफारी कर प्राकृतिक आवास में विचरण कर रहे वन्यजीवों को निकट से देखा तथा वन्य संरक्षण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। जंगल की शांत वादियों में उन्होंने करम (काडिफोलिया) के वृक्ष पर Palm Civit को भी देखा, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता का अद्भुत उदाहरण है।
रात्रि में वनभोज उपरांत संगम तट पर स्थित केचकी रिट्रीट कॉटेज में विश्राम किया। प्रातः 22 फरवरी 2026 को वे बेतला पहुंचे, जहां उन्होंने पालतू हाथियों — जूही, राखी, सीता एवं मुर्गेश — द्वारा संपादित संरक्षण कार्यों एवं उनके स्वभाव के बारे में जानकारी ली तथा अपने हाथों से हाथियों को फल खिलाकर स्नेह व्यक्त किया।
इसके पश्चात उन्होंने बेतला स्थित ऐतिहासिक पलामू किला का भ्रमण किया, जो चेरो राजवंश की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। वहां उन्होंने किले की वर्तमान स्थिति एवं रख-रखाव की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। आगे चलकर उन्होंने कमलदह झील का भी दौरा किया, जहां प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या ने प्राकृतिक सौंदर्य को और भी मनमोहक बना दिया था। इस दौरान उन्होंने रेड क्रेस्टेड पोचर्ड, पिंटेल, गढ़वाल सहित विभिन्न प्रवासी जलपक्षियों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।
भ्रमण के क्रम में माननीय मुख्य न्यायाधीश ने पलामू व्याघ्र प्रबंधन के तहत संचालित जन-भागीदारी हुनर से रोजगार रोजगार कार्यक्रम का भी अवलोकन किया। उन्होंने ग्यारहवीं बैच की महिलाओं एवं युवतियों को दिए जा रहे आवासीय ब्यूटीशियन कोर्स तथा बारहवीं बैच के पुरुष युवाओं को संचालित इलेक्ट्रिशियन कोर्स की गतिविधियों को देखा और प्रतिभागियों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना।
इसके उपरांत उन्होंने बक्सा मोड़ के समीप जंगल क्षेत्र में स्थित मड हाउस ओएसिस का भ्रमण किया, जहां स्थानीय संसाधनों से तैयार लेमनग्रास ग्रीन टी का स्वाद लेकर प्रसन्नता व्यक्त की।
दो दिवसीय इस राजकीय भ्रमण के दौरान पलामू व्याघ्र परियोजना के उपनिदेशक श्री प्रजीशकांत जेना द्वारा समुचित समन्वय एवं सहयोग प्रदान किया गया। माननीय मुख्य न्यायाधीश ने पलामू व्याघ्र परियोजना द्वारा संचालित संरक्षण, इको-टूरिज्म एवं जनसहभागिता आधारित आजीविका कार्यक्रमों की सराहना की और इसे पर्यावरण संरक्षण एवं स्थानीय विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।




