भीलवाड़ा/जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सनातन संस्कृति भारत की प्राचीनतम और मूल आध्यात्मिक धारा है, जिसने सदैव समाज को नैतिकता, कर्तव्य और मानवता का मार्ग दिखाया है।उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसके संस्कारों से है,जहां नारी के प्रति सम्मान,बच्चों को नैतिक शिक्षा और परिवार में सद्भाव की परंपरा सिखाई जाती है।
विधानसभा अध्यक्ष ने रविवार को भीलवाड़ा के हरिशेवा धाम में आयोजित धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए समस्त संतजनों को नमन किया।उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से जीवन को नई दिशा और संस्कार प्राप्त होते हैं तथा मानव जीवन की सार्थकता सिद्ध होती है।

साथ ही वासुदेव देवनानी ने कहा कि आध्यात्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता से मन को शांति और आनंद की अनुभूति होती है तथा दैनिक जीवन के तनाव स्वतः दूर हो जाते हैं।हरिसेवा धाम द्वारा समय-समय पर गौ सेवा,कन्या पूजन, यज्ञ-हवन एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हाल के वर्षों में देश में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता और आस्था का वातावरण सशक्त हुआ है।उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि भारत को केवल महाशक्ति नहीं,बल्कि विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बनना है।संत-महात्माओं के त्याग,तपस्या और मार्गदर्शन से समाज को नैतिक शक्ति मिलती है,जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे शुद्ध आचरण,सेवा एवं परोपकार के माध्यम से सार्थक बनाना चाहिए।उन्होंने स्वयं को इस महायज्ञ में सहभागी बनकर आशीर्वाद प्राप्त करने को सौभाग्यपूर्ण बताया।इस अवसर पर श्री देवनानी ने व्यास पीठ के कथावाचक का माला पहनाकर आशीर्वाद लिया।

कार्यक्रम में हरिशेवा धाम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम ने शॉल ओढाकर स्वागत किया।इस अवसर पर भीलवाड़ा शहर विधायक अशोक कोठारी सहित संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।






