राजस्थान में आज रात 12 बजे से करीब 35 हजार प्राइवेट बसें नहीं चलेंगी। ऑपरेटर्स का कहना है कि RTO कार्रवाई के तहत रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) सस्पेंड कर रहा है।
लाखों रुपए के चालान किए जा रहे हैं। इसके विरोध में रविवार को जयपुर में आयोजित बैठक में हड़ताल का फैसला किया गया है। दूसरे स्टेट के ऑपरेटर्स ने भी उन्हें समर्थन दिया है।
दावा है कि हड़ताल से 15 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हो सकते हैं। ऑपरेटर्स ने धमकी दी है कि अजमेर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री की सभा के लिए भी बसें नहीं दी जाएंगी।

सभी एसोसिएशन के साथ होने का दावा
राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने बताया- हड़ताल में स्टेट कैरिज, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज और लोक परिवहन की करीब 35 हजार बसें शामिल होंगी।
उन्होंने बताया कि अजमेर में 28 फरवरी को प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के लिए भी बसें उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी। राजेंद्र शर्मा के अनुसार, टैक्सी ऑपरेटर्स ने भी समर्थन दिया है और वे भी हड़ताल में शामिल रहेंगे।
उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों से राजस्थान आने वाली बसें भी राज्य की सीमा में जहां पहुंचेंगी, वहीं खड़ी कर दी जाएंगी।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के बस ऑपरेटर्स ने भी समर्थन जताया है। उन्होंने राजस्थान के लिए संचालन बंद रखने की बात कही है।
आरटीओ की कार्रवाई पर नाराजगी
राजेंद्र शर्मा ने बताया कि प्राइवेट बस ऑपरेटर्स को लगातार परेशान किया जा रहा है। बसों और टैक्सियों में लगेज केरियर लगाने पर रोक लगा दी गई है और इस पर भी जुर्माना वसूला जा रहा है।
ऑपरेटर्स का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में चलने वाली बसों में यात्री अक्सर अपना सामान छत पर रखते हैं। लगेज केरियर हटने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
इसी तरह टैक्सियों में भी छत पर सामान रखने की व्यवस्था रहती है। टूरिस्ट और लंबी दूरी के यात्रियों के लिए यह व्यवस्था जरूरी बताई गई है।
ऑपरेटर्स का कहना है कि अगर सरकार और परिवहन विभाग के साथ बातचीत में समाधान नहीं निकला तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।
पुरानी बसों में धारा 153 में चालान करना सही नहीं
बस ऑपरेटर्स का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 में भारी-भरकम चालान बनाए जा रहे हैं। यह धारा साल 2025 में जोड़ी गई है। ऐसे में जो पुरानी बस हैं, उन्हें इस धारा के मुताबिक चालान करना उचित नहीं है।
बसों के मामले में यह धारा तब लगाई जाती है, जब वाहन की बॉडी में बिना अनुमति बदलाव किया गया हो। ओवरलोडिंग या सेफ्टी नियमों का उल्लंघन हो। फिटनेस सर्टिफिकेट की शर्तों का पालन नहीं हो रहा हो। डिजाइन या स्ट्रक्चर (जैसे ऊंचाई, लंबाई, ओवरहैंग आदि) तय मानकों के मुताबिक न हो ।





